तात्कालिक चेतावनी

प्रत्यक्ष मौसम

उपरितन वायु मौसम उपकरण


भारत उन चुनिंदा देशों में से है, जो अपने खुद के उपरितन वायु और सतह उपकरणों का निर्माण करते हैं। मौसम विज्ञान विभाग द्वारा विभागीय उत्पादन सुविधाओं के माध्यम से यह सब कार्य किया जाता है।

 

उपरितनवायु उपकरणसंबंधीसभी तकनीकी पहलुओं के समन्वय का दायित्व मौसम विज्ञान विभाग के उपमहानिदेशक (उपरितन वायु उपकरण),नई दिल्ली केआगरा में हाइड्रोजन फैक्ट्री और नई दिल्ली में प्रयोगशालाओं और कार्यशाला का है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के वर्तमान उपरितन वायु प्रेक्षण संजाल में पूरे देश में फैले 39 रेडियोसॉन्डे और 62 पवन सूचक गुब्बारा वेधशालाएं शामिल हैं। विभाग में उपरितन वायु के प्रेक्षण वर्ष 1905 में शिमला में शुरू हुए। 1912 में आगरा में एक उपरितनवायु वेधशाला शुरू की गई थी। भारत मौसम विज्ञान विभाग, नई दिल्ली कीअपनी कार्यशाला में स्वयं के रेडियोसॉन्डे बनाए जाते हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा अन्य संस्थाओं (एजेंसियों) को भी रेडियोसॉन्डे की आपूर्ति की जाती है। रेडियोसॉण्डे प्रेक्षणों के लिए आगरा में हाइड्रोजन गैस का उत्पादन किया जाता है। इसके अलावा, उपरितन वायु आँकड़ों की गुणवत्ता में सुधार के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग में निरंतर शोधऔर विकास कार्य जारी हैं।

 

भारत मौसम विज्ञानविभाग का मौसम रेडार संजाल

भारत मौसम विज्ञान विभाग में विभिन्न मौसम प्रणालियों जैसे, गरज के साथ तूफान,ओलावृष्टि और चक्रवाती तूफान के मार्ग का पता लगाने के लिए रेडार का उपयोग किया जाता है।इनका उपयोग वर्षा काअनुमान और ओला की चेतावनी के लिए भी किया जाता है। डॉपलर मौसम रेडार के आँकड़ों से तैयार किए गए विभिन्न मौसम विज्ञान, जल विज्ञान और विमानन संबंधीउत्पाद पूर्वानुमान के लिए बेहद उपयोगी हैं। तूफान की तीव्रता, स्थान और हवाई जहाजों और समुद्रीजहाजों के सुरक्षित पथ-प्रदर्शनके लिए आगेके मार्ग का अनुमान लगाने में भीरेडार मदद करता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने डिजिटल तकनीक का उपयोग कर डॉपलर रेडार के साथ प्रेक्षणीय संजाल में पारंपरिक रेडार को उन्नत किया है। लागत कम करने और आत्मनिर्भरता के लिए उन्नत रेडार तकनीक को डिजाइन और विकसित करने के लिए स्वदेशी प्रयास भी किए गए। इसरो, डॉसके साथ एक समझौता ज्ञापन के तहत, वर्ष2004 मेंश्रीहरिकोटा में एक एस-बैंड, डॉपलर मौसम रेडार डिजाइन, विकसित और स्थापित किया गया था। 2007 में, भारत मौसम विज्ञान विभाग के वेधशाला संजाल के आधुनिकीकरण के तहत 13 पुराने और अप्रचलित एनालॉग रेडार को डॉपलर मौसमरेडार (डी.डब्ल्यू.आर) से बदल दिया गया।) भारत मौसम विज्ञान विभाग की आधुनिकीकरण योजना के दूसरे चरण में, पूरे भारत में विभिन्न स्थानों पर 30डॉपलर मौसम रेडार खरीदने और स्थापित करने का प्रस्ताव है। पश्चिमी और मध्य हिमालय के लिए "एकीकृत हिमालयी मौसम विज्ञान कार्यक्रम" योजना के तहत पहाड़ी क्षेत्र में 9डॉपलर मौसमरेडार स्थापित करने की एक अलग योजना है। अमरनाथ यात्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए श्रीनगर में एक एक्स-बैंड डॉपलर मौसम रेडार की स्थापना की जा रही है। तात्कालिक पूर्वानुमान के लिए संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल के लिए आँकड़े प्रदान करने के लिए मौजूदा डॉपलर मौसम रेडार काभी संजाल तैयार किया गया है। इस प्रकार भारत मौसम विज्ञान विभाग की प्रेक्षणीय और पूर्वानुमान प्रणालियों के आधुनिकीकरण में रेडार संजाल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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