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मॉनसून


और मॉनसून का आरम्भ उसका आगे बढ़ना

केरल में मॉनसून के आरम्भ और पूरे देश में इसके आगे बढ़ने के लिए पालन किए जाने वाले दिशा-निर्देश निम्नलिखित हैंः-

a) वर्षा-

यदि 10मई के पश्चात सूचिगत उपलब्ध14 स्थानों, जैसे मिनीकॉय, एमिनी, तिरूवनतपुरम, पुनालुर, कोल्लम, अलपुजा, कोट्टयम, कोच्चि , त्रिसुर, कोजीकोड,तलासरी, कन्नूर, कुडुलु और मंगलोर में से 60% स्थानो पर लगातार दो दिन में2.5 मिमी या अधिक वर्षा हो तो उसके अगले दिन मॉनसून के आरम्भ की धोषणा की जाए, बशर्ते निम्नलिखत मानदंड़ भी पूरे होते हों।

b) पवन क्षेत्र

पछुआ हवाओं का अन्तविर्तस्तार भूमध्य रेखा से अक्षांश 100उ. और देशांतर 550पूर्व से 800पूर्व तक 600 हेक्टा पास्कल तक हो। अक्षांश 5-100उ. देशांतर 70-800पू. के क्षेत्र में क्षेत्रीय पवन गति 925 हेक्टापास्कल पर 15-20 नॉट होनी चाहिए। ऑकडें का स्रोत आर एस एम सी पवन विश्लेषण उपग्रह से व्युत्पन्न वायु हो सकता है।

c) बहिर्गामी दीर्घ तरंग विकिरण (ओ.एल.आर)

इनसैट द्वारा व्युत्पन्न बहिर्गामी दीर्घ तंरग विकिरण (ओ.एल.आर) मान अक्षांश 5-10 उ. देशांतर 70-750पूर्व पर 200 डब्लयू एम -2से कम होने चाहिेए।

मॉनसून की उत्तरी सीमा

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्यतः एक जून को केरल में आरम्भ होता है। यह आमतौर पर महोर्मि में उत्तर दिशा में आगे बढ़ता है और 15 जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है। मॉनसून की सबसे उत्तरी सीमा मॉनसून की वह उत्तरी सीमा होती है। जहाँ तक यह किसी भी दिन पहुँचता है।